जब कोई बड़ा ब्रोकरेज किसी स्टॉक पर “Buy” कॉल देता है, तो बाजार सिर्फ target price नहीं देखता, बल्कि उसके पीछे की पूरी सोच को समझने की कोशिश करता है। इस बार ICICI Securities ने दो अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों पर हाई-कन्विक्शन Buy रेटिंग दी है। एक तरफ फार्मा CDMO प्ले है और दूसरी तरफ देश की बड़ी NBFC। दोनों की कहानी अलग है, लेकिन लॉजिक साफ है।

पहला स्टॉक
Akums Drugs & Pharmaceuticals Ltd भारत की सबसे बड़ी CDMO कंपनियों में से एक है। इसका बिज़नेस मॉडल simple है – दूसरी फार्मा कंपनियों के लिए दवाइयां develop और manufacture करना। Tablets, capsules, injectables से लेकर liquids तक, इसका portfolio काफी diversified है।
शेयर हाल ही में ₹450 के आसपास ट्रेड कर रहा था, और ब्रोकरेज ने इस पर ₹600 का Buy टारगेट दिया है। यानी मौजूदा स्तर से करीब 30% से ज्यादा का संभावित upside, लेकिन असली वजह numbers से ज्यादा business visibility है।
Akums के हालिया नतीजे क्या कहते हैं
Q2 FY26 में कंपनी का revenue थोड़ा दबाव में रहा और ₹1,033 करोड़ से घटकर ₹1,018 करोड़ पर आ गया। इसी दौरान net profit भी ₹67 करोड़ से घटकर ₹43 करोड़ रहा। पहली नजर में ये numbers weak लग सकते हैं, लेकिन ब्रोकरेज इन्हें temporary मान रहा है।
API प्राइस और cost-plus मॉडल की कहानी
Akums cost-plus मॉडल पर काम करती है। आसान शब्दों में, API यानी कच्चे माल की कीमत अगर ऊपर-नीचे होती है, तो उसका असर margins पर सीमित रहता है। Domestic market में 30 APIs के analysis से पता चलता है कि लगभग आधी APIs की कीमतें stable या बेहतर रहीं। यही stability आगे margins को support दे सकती है।
GST rate cut जैसी challenges के बावजूद कंपनी ने Q2 FY26 में करीब 7% volume growth दिखाई, जो demand की मजबूती को दर्शाता है।
Export orders से CDMO ग्रोथ को बूस्ट
Q2 FY26 के अंत में Akums की CDMO capacity utilization करीब 40% थी। यानी काफी खाली क्षमता थी, जिसे अब exports के जरिए fill किया जा रहा है। कंपनी ने Zambia सरकार के साथ JV किया है, जहां local manufacturing की तैयारी है।
FY27–28 में हर साल करीब USD 25 million की सप्लाई का प्लान है, जो आगे चलकर USD 45–50 million तक जा सकता है। इसके अलावा Europe से जुड़े contracts की सप्लाई Q1 FY28 से शुरू होने की उम्मीद है, जिससे ₹3,000–3,500 करोड़ सालाना revenue बन सकता है। ब्रोकरेज का मानना है कि ये export orders margin-accretive होंगे।
दूसरा स्टॉक
दूसरा स्टॉक है Shriram Finance Ltd, जो retail asset financing में बड़ा नाम है। Commercial vehicles, MSME loans, gold loans और personal finance जैसे segments में इसकी मजबूत पकड़ है।
शेयर हाल ही में ₹960–980 के रेंज में था, और ICICI Securities ने इस पर ₹1,225 का Buy टारगेट दिया है। मतलब करीब 28% का upside potential।
Shriram Finance के नतीजे और ग्रोथ संकेत
Q2 FY26 में कंपनी का revenue ₹10,090 करोड़ से बढ़कर ₹11,912 करोड़ हो गया, यानी करीब 18% की growth। Net profit भी ₹2,153 करोड़ से बढ़कर ₹2,314 करोड़ पहुंचा। ये numbers बताते हैं कि core lending business steady है।
Capital infusion और funding cost का असर
Shriram Finance का cost of borrowing अभी peers से 100–125 basis points ज्यादा है। Br okerage का मानना है कि equity infusion और strong foreign partner की entry से credit rating upgrade संभव है। अगर rating सुधरती है, तो borrowing cost नीचे आ सकती है।
कम funding cost से दो फायदे हो सकते हैं। या तो कंपनी faster growth के लिए loans सस्ते में दे पाए, या फिर margins improve करके profitability बढ़ाए। दोनों ही scenarios में long-term RoE मजबूत होने की संभावना है।
एक नजर में दोनों स्टॉक्स का सार
| कंपनी | सेक्टर | ब्रोकरेज टारगेट | मुख्य वजह |
|---|---|---|---|
| Akums Drugs | Pharma CDMO | ₹600 | Export growth, margin visibility |
| Shriram Finance | NBFC | ₹1,225 | Lower funding cost, growth acceleration |
आखिर में क्या समझना जरूरी है
ICICI Securities की यह Buy कॉल short-term price movement से ज्यादा long-term visibility पर आधारित है। Akums में export-led CDMO growth की कहानी है, जबकि Shriram Finance में funding cost और scale का खेल है। दोनों अलग सेक्टर की कंपनियां हैं, लेकिन common factor यही है कि इनके business models आने वाले सालों में steady growth दिखा सकते हैं।
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